घोड़े को सबक

घोड़े को सबक



एक आदमी के पास एक घोड़ा और एक गधा था। एक दिन वह इन दोनों को लेकर बाजार जा रहा था। उसने गधे की पीठ पर खूब सामान लादा था। घोड़े की पीठ पर कोई सामान नहीं था।

रास्ते में गधे ने घोड़े से कहा, भाई मेरी पीठ पर बहुत ज्यादा वजन है। थोड़ा बोझ तुम भी अपनी पीठ पर ले लो।



घोड़े ने कहा, बोझ ज्यादा हो या कम, मुझे इससे कुछ लेना-देना नहीं है। यह बोझ तुम्हारा है और इसे तुम्हें ही उठाकर चलना है। मुझसे इसके बारे में कुछ मत कहो।

यह सुनकर गधा चुप हो गया। फिर वे तीनों चुपचाप चलने लगे। थोड़ी देर बाद भारी बोझ के कारण गधे के पाँव लड़खड़ाने लगे और वह रास्ते पर गिर पड़ा। उसके मुँह से झाग निकलने लगा।

इसके बाद उस आदमी ने गधे की पीठ से सारा सामान उतार दिया।उसने यह सारा बोझ घोड़े की पीठ पर लाद दिया।



चलते-चलते घोड़ा सोचने लगा, यदि मैंने गधे का कुछ भार अपनी पीठ पर ले लिया होता, तो कितना अच्छा होता। अब मुझे सारा बोझ उठाकर बाजार तक ले जाना पड़ेगा।



शिक्षा -दूसरों के दुःख-दर्द में हाथ बँटाने से हमारा दुःख-दर्द भी कम हो जाता है।

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