टोपीवाला और बंदर

ग्वालिन और उसका सपना



एक ग्वालिन थी। वह दूध बेचने जा रही थी। उसके सर पर दूध से भरा घड़ा था। चलते चलते मन ही मन विचार कर रही थी। इस दूध को बेचने से जो पैसा मिलेगा। उन पैसो से मैं अंडे खरीदूँगी उन अंडो से मुझे अनेक अच्छी अच्छी मुर्गियाँ मिलेगीं उन मुर्गियों को बेच कर मैं अपने लिए रेशमी साड़ी खरीदूंगी। उस रेशमी साड़ी मे मैं बहुत सुंदर दिखाई दूँगी फिर अच्छे अच्छे लड़के मेरे पास आएग। मुझसे शादी करना चाहेंगे। पर मैं इनकार में अपना सर झटकर कहूँगी नही।



यह सोचते हुए उसने अपने सर को जोर से झटका दिया। इसके करण उसके सरपर रखा दूध का घड़ा जमीन पर गिर गया। उसका सारा दूध जमीन पर फैल कर बर्बाद हो गया। इस तरह अंड़ो मुर्गियों रेशमी साड़ी तथा अच्छे अच्छे लड़को का ग्वालिन का सपना मिट्टी में मिल गया।



शिक्षा -हवा में महल बनाना अच्छा नही!

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